वन्दे मातरम् · जय हिन्द

देश के लिए हर रोज़ एक घंटा

गदर पार्टी के अमर शहीदों की प्रेरणा से — एक शांतिपूर्ण जन-आंदोलन। संस्थापक संजय पूनिया के आह्वान पर, 15 जुलाई 2026 से हर नागरिक रोज़ सिर्फ़ एक घंटा देश की सेवा, जागरूकता और स्वच्छ प्रशासन को दे।

अहिंसक क्रांति जागरूकता ही हथियार गांव-गांव तक
11 देशभक्त इस अपील से जुड़ चुके हैं
अपील से जुड़ें शहीदों को नमन
हमारी मुहिम
1
घंटा रोज़ — देश के नाम
यही गदर सेवा आंदोलन की मुहिम है। हर नागरिक रोज़ सिर्फ़ एक घंटा दे — सेवा, जागरूकता और स्वच्छ प्रशासन के लिए। यही आज की असली क्रांति है।
सेवा जागरूकता स्वच्छ प्रशासन
अमर शहीद

जिनके बलिदान से हम आज़ाद हैं

गदर आंदोलन के नायक — जिन्होंने विदेश की सुख-सुविधा छोड़कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

Kartar Singh Sarabha
क
19 वर्ष के अमर शहीद

करतार सिंह सराभा

"मुझे फिर से भारत में जन्म मिले, ताकि मैं फिर देश के लिए बलिदान दे सकूँ।"

1896 – 1915
Sohan Singh Bhakna
स
गदर पार्टी के प्रथम अध्यक्ष

सोहन सिंह भकना

"देश की सेवा में बिताया हर पल जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।"

1870 – 1968
Lala Har Dayal
ल
विचारक एवं संस्थापक

लाला हरदयाल

"अपने विचारों को इतना ऊँचा उठाओ कि वे राष्ट्र को जगा दें।"

1884 – 1939
Vishnu Ganesh Pingle
व
1915 विद्रोह के शहीद

विष्णु गणेश पिंगले

"मातृभूमि के लिए फाँसी का फंदा भी फूलों का हार है।"

1888 – 1915
Bhai Parmanand
भ
काला पानी के सेनानी

भाई परमानंद

"कष्ट सहना ही क्रांतिकारी की सच्ची शिक्षा है।"

1876 – 1947
Shaheed Bhagat Singh
श
गदर विरासत के वारिस

शहीद भगत सिंह

"वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन मेरे विचारों को नहीं।"

1907 – 1931
अमर वाणी

क्रांति की आवाज़ें

विरासत

गदर पार्टी का इतिहास

1913

स्थापना — युगांतर आश्रम, सैन फ्रांसिस्को

लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा, भाई परमानंद और तारकनाथ दास ने पार्टी की नींव रखी। साप्ताहिक "गदर" अखबार के पहले पन्ने पर लिखा होता था — "अंग्रेज़ी राज का दुश्मन"।

1914

कोमागाटा मारू की त्रासदी

कनाडा से लौटाए गए जहाज़ के निर्दोष यात्रियों पर कलकत्ता में ब्रिटिश पुलिस ने गोलियाँ चलाईं। इस अन्याय ने पूरे प्रवासी भारत को झकझोर दिया।

1915

गदर विद्रोह और बलिदान

हज़ारों गदरी भारत लौटे, पर मुखबिरी से योजना उजागर हो गई। लाहौर षड्यंत्र केस में 19 वर्षीय करतार सिंह सराभा समेत कई क्रांतिकारियों को फाँसी हुई, अनेकों को काला पानी भेजा गया।

2026

विरासत से संकल्प तक

भगत सिंह करतार सिंह सराभा को अपना हीरो मानते थे। उसी चिंगारी को हम आज सेवा की मशाल बनाते हैं — शांतिपूर्ण, संविधान-सम्मत जन-आंदोलन के रूप में।

प्रेरणा-पुरुष

शहीद भगत सिंह — आंदोलन की आत्मा

करतार सिंह सराभा को अपना गुरु मानने वाले भगत सिंह — गदर की चिंगारी और आज के आंदोलन के बीच की सबसे मज़बूत कड़ी हैं।

Shaheed Bhagat Singh
भ
जन्म 1907 · बलिदान 1931
क्रांतिकारी · विचारक · शहीद-ए-आज़म

शहीद भगत सिंह

मात्र 23 वर्ष की उम्र में हँसते-हँसते फाँसी चढ़ने वाले भगत सिंह सिर्फ़ एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि एक गहरे विचारक थे। उन्होंने साबित किया कि असली हथियार बंदूक नहीं — बल्कि विचार, कलम और जागरूकता है। जेल में लिखी उनकी डायरी और 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' आज भी युवाओं को सोचने पर मजबूर करती है।

गदर सेवा आंदोलन ने भगत सिंह की मूर्ति को अपने केंद्र में रखा है — इसलिए नहीं कि हम हिंसा चाहते हैं, बल्कि इसलिए कि हम उनके उस सपने को पूरा करना चाहते हैं जिसमें हर नागरिक जागरूक, निडर और देश के प्रति समर्पित हो। उनका 'इंक़लाब' आज सेवा, शिक्षा और स्वच्छ प्रशासन की क्रांति है।

“इंक़लाब ज़िंदाबाद” — शहीद भगत सिंह
संस्थापक

जिन्होंने यह मुहिम शुरू की

1913 की चिंगारी को 2026 में मशाल बनाने वाले — एक आम नागरिक का असाधारण संकल्प।

Sanjay Poonia
सं
स्थापना · 15 जुलाई 2026
संस्थापक · गदर सेवा आंदोलन

संजय पूनिया

संजय पूनिया कोई नेता या पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक आम नागरिक हैं — जिन्होंने गदर पार्टी के अमर शहीदों की विरासत को एक जीवित जन-आंदोलन का रूप दिया। भगत सिंह की मूर्ति को केंद्र में रखकर उन्होंने संकल्प लिया कि देशभक्ति सिर्फ़ 15 अगस्त या 26 जनवरी तक सीमित न रहे, बल्कि हर दिन की आदत बन जाए।

उनका सपना सत्ता पाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को नीचे से — गांव और मोहल्ले से — सुधारना है। उनका मानना है कि जब हर मोहल्ले की समस्या का समाधान उसी मोहल्ले की समिति करेगी, तभी लोकतंत्र सही मायने में मज़बूत होगा।

— संजय पूनिया संस्थापक, गदर सेवा आंदोलन
आंदोलन की दिशा

भविष्य का विज़न — पाँच संकल्प

15 जुलाई 2026 के बाद यह आंदोलन 'स्वयंसेवा' से आगे बढ़कर 'नागरिक अधिकार' का एक बड़ा मंच बनेगा।

🛰️

निगरानी तंत्र का विस्तार

हर जिले में सक्रिय समितियों के साथ 'डिजिटल निगरानी' का जाल — एक 'सोशल ऑडिट' सिस्टम, जहाँ सरकारी बजट रोटी, कपड़ा और मकान पर ही खर्च हो, और आम आदमी खुद अपने इलाके का प्रहरी बने।

🤝

नागरिक समाज का सशक्तिकरण

राजनीति में जाने के बजाय एक 'प्रेशर ग्रुप' के रूप में काम — लक्ष्य सत्ता नहीं, बल्कि अधिकारियों और नेताओं पर इतना दबाव कि वे जनता की जवाबदेही से भाग न सकें।

🌾

स्वदेशी आर्थिक मॉडल

'गांव-गांव कैंटीन' का विजन — हर गांव में स्थानीय उत्पादन (मसाले, घरेलू वस्तुएं) और वितरण की एक चेन, जो बिचौलियों पर निर्भरता खत्म करे और रोज़गार व आत्मनिर्भरता बढ़ाए।

⏱️

प्रतिदिन 60 मिनट का संकल्प

युवाओं की एक ऐसी फौज, जो अपनी दैनिक व्यस्तता में से 60 मिनट देश को दे। इस संकल्प को भारतीय संस्कृति का हिस्सा बनाना — ताकि देशभक्ति एक दैनिक दिनचर्या बन जाए।

🔥

भगत सिंह की विचारधारा

युवा पीढ़ी को 'अहिंसक क्रांतिकारी' बनाना — ऐसे लोग जो कलम, सोशल मीडिया और जागरूकता के माध्यम से व्यवस्था में बदलाव लाएँ, बंदूक से नहीं।

🏛️

नीचे से ऊपर तक सुधार

व्यवस्था को ऊपर से नहीं, बल्कि गांव और मोहल्ले से सुधारना — यह सामाजिक तंत्र इतना मज़बूत हो कि कोई भ्रष्ट अधिकारी अपने पद को 'जागीर' न समझ सके।

“देश बदलने के लिए कुर्सी नहीं, संकल्प चाहिए। तुम्हारा रोज़ का एक घंटा ही इस देश की सबसे बड़ी क्रांति है।”

— संजय पूनिया, संस्थापक
हमारा मिशन

आज की लड़ाई — जागरूकता की लड़ाई

आज़ाद भारत में हमारी लड़ाई अज्ञानता, उदासीनता और भ्रष्टाचार से है — पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में।

01

रोज़ 1 घंटा देश के लिए

हर सदस्य रोज़ दो लोगों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करे।

02

मोहल्ला संगठन

आस-पास के लोगों को देशहित के रचनात्मक कामों के लिए इकट्ठा करें — सफ़ाई, शिक्षा, रक्तदान, वृक्षारोपण, मतदाता जागरूकता।

03

स्वच्छ प्रशासन की माँग

RTI और कानूनी माध्यमों से पारदर्शिता की माँग। पूर्णकालिक सेवा देने वाले संगठन के समर्पित कार्यकर्ता बनें।

सदस्यता शपथ
  • १मैं रोज़ कम से कम एक घंटा देश की सेवा में दूँगा/दूँगी।
  • २मैं रोज़ दो लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करूँगा/करूँगी।
  • ३मैं सदैव शांतिपूर्ण, अहिंसक और संविधान-सम्मत मार्ग पर चलूँगा/चलूँगी।
  • ४मेरा इनाम है देश की सेवा, मेरी पेंशन है आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ प्रशासन।
यह आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण, कानूनी और भारतीय संविधान के प्रति समर्पित है।
आह्वान

अब देश तुम्हें पुकार रहा है

1913 में उन्होंने देश के लिए जान दी थी। 2026 में हम देश के लिए सिर्फ़ एक घंटा दें — यही उनके सपनों का सच्चा प्रणाम है।

जो देश के लिए मिटे, वे अमर हो गए। अब वक़्त है देश के लिए जीने का।

एक घंटा रोज़ — यही आज की क्रांति है।
देश बंदूक से नहीं, तुम्हारे दिए हुए वक़्त से बदलेगा।
जागरूकता ही हमारा हथियार है।
एक जागा हुआ नागरिक हज़ार भ्रष्ट हाथों पर भारी पड़ता है।
सराभा 19 की उम्र में देश पर मिट गए।
वे हँसते-हँसते फाँसी चढ़ गए — क्या हम रोज़ का एक घंटा भी न दें?
देश बदलने को कुर्सी नहीं, संकल्प चाहिए।
बदलाव सत्ता से नहीं, हर घर की जागरूकता से शुरू होता है।
तुम्हारा एक घंटा किसी और का पूरा कल है।
आज दी गई जागरूकता आने वाली पीढ़ी की सबसे बड़ी विरासत बनेगी।
इतिहास ने पूछा था — कौन मरेगा? आज पूछता है — कौन जागेगा?
अमर होने के लिए मरना नहीं — बस जागना और औरों को जगाना काफ़ी है।
राष्ट्रीय अपील

अपील से जुड़ें — आवाज़ बनें

"मैं सहमत हूँ कि रोज़ एक घंटा देश के लिए देना हर नागरिक का कर्तव्य है।" — अगर आप सहमत हैं, तो अपना नाम, ईमेल और फ़ोन दर्ज करें। आपका नाम इस आंदोलन की ताक़त बनेगा।

अब तक सहमत
11
देशभक्त इस अपील से जुड़ चुके हैं
लक्ष्य: 1,000 हस्ताक्षर — 15 अगस्त तक
जय हिन्द! आपका नाम अपील में दर्ज हो गया। मिलकर बदलाव लाएँगे। 🇮🇳