वन्दे मातरम् · जय हिन्द

देश के लिए एक घंटा

गदर पार्टी के अमर शहीदों की प्रेरणा से — एक शांतिपूर्ण जन-आंदोलन। 15 जुलाई से हर नागरिक रोज़ एक घंटा देश की सेवा, जागरूकता और स्वच्छ प्रशासन को दे।

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अपील से जुड़ें शहीदों को नमन
हमारी मुहिम
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घंटा रोज़ — देश के नाम
यही गदर सेवा आंदोलन की मुहिम है। हर नागरिक रोज़ सिर्फ़ एक घंटा दे — सेवा, जागरूकता और स्वच्छ प्रशासन के लिए। यही आज की असली क्रांति है।
सेवा जागरूकता स्वच्छ प्रशासन
अमर शहीद

जिनके बलिदान से हम आज़ाद हैं

गदर आंदोलन के नायक — जिन्होंने विदेश की सुख-सुविधा छोड़कर मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

Kartar Singh Sarabha
19 वर्ष के अमर शहीद

करतार सिंह सराभा

"मुझे फिर से भारत में जन्म मिले, ताकि मैं फिर देश के लिए बलिदान दे सकूँ।"

1896 – 1915
Sohan Singh Bhakna
गदर पार्टी के प्रथम अध्यक्ष

सोहन सिंह भकना

"देश की सेवा में बिताया हर पल जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है।"

1870 – 1968
Lala Har Dayal
विचारक एवं संस्थापक

लाला हरदयाल

"अपने विचारों को इतना ऊँचा उठाओ कि वे राष्ट्र को जगा दें।"

1884 – 1939
Vishnu Ganesh Pingle
1915 विद्रोह के शहीद

विष्णु गणेश पिंगले

"मातृभूमि के लिए फाँसी का फंदा भी फूलों का हार है।"

1888 – 1915
Bhai Parmanand
काला पानी के सेनानी

भाई परमानंद

"कष्ट सहना ही क्रांतिकारी की सच्ची शिक्षा है।"

1876 – 1947
Shaheed Bhagat Singh
गदर विरासत के वारिस

शहीद भगत सिंह

"वे मुझे मार सकते हैं, लेकिन मेरे विचारों को नहीं।"

1907 – 1931
अमर वाणी

क्रांति की आवाज़ें

विरासत

गदर पार्टी का इतिहास

1913

स्थापना — युगांतर आश्रम, सैन फ्रांसिस्को

लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा, भाई परमानंद और तारकनाथ दास ने पार्टी की नींव रखी। साप्ताहिक "गदर" अखबार के पहले पन्ने पर लिखा होता था — "अंग्रेज़ी राज का दुश्मन"।

1914

कोमागाटा मारू की त्रासदी

कनाडा से लौटाए गए जहाज़ के निर्दोष यात्रियों पर कलकत्ता में ब्रिटिश पुलिस ने गोलियाँ चलाईं। इस अन्याय ने पूरे प्रवासी भारत को झकझोर दिया।

1915

गदर विद्रोह और बलिदान

हज़ारों गदरी भारत लौटे, पर मुखबिरी से योजना उजागर हो गई। लाहौर षड्यंत्र केस में 19 वर्षीय करतार सिंह सराभा समेत कई क्रांतिकारियों को फाँसी हुई, अनेकों को काला पानी भेजा गया।

2026

विरासत से संकल्प तक

भगत सिंह करतार सिंह सराभा को अपना हीरो मानते थे। उसी चिंगारी को हम आज सेवा की मशाल बनाते हैं — शांतिपूर्ण, संविधान-सम्मत जन-आंदोलन के रूप में।

हमारा मिशन

आज की लड़ाई — जागरूकता की लड़ाई

आज़ाद भारत में हमारी लड़ाई अज्ञानता, उदासीनता और भ्रष्टाचार से है — पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में।

01

रोज़ 1 घंटा देश के लिए

हर सदस्य रोज़ दो लोगों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करे।

02

मोहल्ला संगठन

आस-पास के लोगों को देशहित के रचनात्मक कामों के लिए इकट्ठा करें — सफ़ाई, शिक्षा, रक्तदान, वृक्षारोपण, मतदाता जागरूकता।

03

स्वच्छ प्रशासन की माँग

RTI और कानूनी माध्यमों से पारदर्शिता की माँग। पूर्णकालिक सेवा देने वाले संगठन के समर्पित कार्यकर्ता बनें।

सदस्यता शपथ
  • मैं रोज़ कम से कम एक घंटा देश की सेवा में दूँगा/दूँगी।
  • मैं रोज़ दो लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करूँगा/करूँगी।
  • मैं सदैव शांतिपूर्ण, अहिंसक और संविधान-सम्मत मार्ग पर चलूँगा/चलूँगी।
  • मेरा इनाम है देश की सेवा, मेरी पेंशन है आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ प्रशासन।
यह आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण, कानूनी और भारतीय संविधान के प्रति समर्पित है।
आह्वान

अब देश तुम्हें पुकार रहा है

1913 में उन्होंने देश के लिए जान दी थी। 2026 में हम देश के लिए सिर्फ़ एक घंटा दें — यही उनके सपनों का सच्चा प्रणाम है।

जो देश के लिए मिटे, वे अमर हो गए। अब वक़्त है देश के लिए जीने का।

एक घंटा रोज़ — यही आज की क्रांति है।
देश बंदूक से नहीं, तुम्हारे दिए हुए वक़्त से बदलेगा।
जागरूकता ही हमारा हथियार है।
एक जागा हुआ नागरिक हज़ार भ्रष्ट हाथों पर भारी पड़ता है।
सराभा 19 की उम्र में देश पर मिट गए।
वे हँसते-हँसते फाँसी चढ़ गए — क्या हम रोज़ का एक घंटा भी न दें?
देश बदलने को कुर्सी नहीं, संकल्प चाहिए।
बदलाव सत्ता से नहीं, हर घर की जागरूकता से शुरू होता है।
तुम्हारा एक घंटा किसी और का पूरा कल है।
आज दी गई जागरूकता आने वाली पीढ़ी की सबसे बड़ी विरासत बनेगी।
इतिहास ने पूछा था — कौन मरेगा? आज पूछता है — कौन जागेगा?
अमर होने के लिए मरना नहीं — बस जागना और औरों को जगाना काफ़ी है।
राष्ट्रीय अपील

अपील से जुड़ें — आवाज़ बनें

"मैं सहमत हूँ कि रोज़ एक घंटा देश के लिए देना हर नागरिक का कर्तव्य है।" — अगर आप सहमत हैं, तो अपना नाम, ईमेल और फ़ोन दर्ज करें। आपका नाम इस आंदोलन की ताक़त बनेगा।

अब तक सहमत
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देशभक्त इस अपील से जुड़ चुके हैं
लक्ष्य: 1,000 हस्ताक्षर — 15 अगस्त तक
जय हिन्द! आपका नाम अपील में दर्ज हो गया। मिलकर बदलाव लाएँगे। 🇮🇳